एहसाास वर्षा का

पेड़ -पौधें लहराते

हवाओं में,

बिजली चमकती

बादालो में,

मैं भी घिर गया

तूफ़ानो मे,

कट रहे थे पल

मुश्किलों में।

कोई पूछे हाल हमारा

यही आश लगा

हम बैठे थे ,

याद आ रही अपनो की

बस रब को याद किये

जा रहे थे ,

गरजते -गरजते बादल

पानी का पेगा़म

बता रहे थे ,

छुआ हृदय तो

खुशी का जाम

पिला रहें थे।

Advertisements

2 comments

Comments are closed.