चल -चले मिले कहीं  🌹🌹🌹🌹🌹विदा -सन्देश 

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चल-चले मिले कहीं 
न तेरा आश्रय न मेरा,
प्रीति-गीत गाए कहीं 
चल-चले मिले कहीं।

सच-झूठ की फिकर नही
जिस राहा पर मिला,
मैं अजनबी नही,
चल-चले मिले कहीं।।

तेरे सपने मेरे अपने
यादों के संग चले,
आ फ़िर मिले  कहीं,
चल-चले मिले कहीं।।। 
ऋषि के.सी .🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

वक़्त

​ठहरजाता है वक़्त,

थम जाता है वक़्त,

वक़्त की मिज़ाज़ क्या?

हार जाते है सब।

ज़रा देखो, जरा सोचो!

निर्जिव जो,भागे तेज़

जरा सोचो, जरा देखो!

खुली किताब, पढी पेज।
यह ज़िंदगी की गाड़ी है,
दोस्तों!
पतानी जाती किधर है।

सुबाह सूरज की है,

रात चन्द्रमा की अकड़ है।
नया क्या, पुराना क्या,

हर कोई जिंदगी का लेसन है।
खव्वाब लेता कौन?

सब देते भाषण है।
ठहरजाता है वक़्त,

थम जाता है वक़्त,

वक़्त की मिज़ाज़ क्या? 

हार जाते है सब।

राजा राम मोहन राय

नानी आज कोई कहानी सुनाओ,
जिसमे में राजा आए,

और नाहि रानी की बीती बताओं,

नानी जरा मुस्कुराकर कह दो,

गाथा वीर भरी |


एक नारी समाज के रूढ़ि से डरी,

देख आए जब प्यारे मोहन लाल,

बालक को ना जाने, क्यों गुस्सा आया उस साल ?

जिस वक़्त भाभी, थी आग में बैठी थी,

भैया थे तब, परलोक सुधार,

बता दो लोगो, तुमने बना दिए कौन से नियम-सार,

ईश्वर की संतान, बनकर बैठ गए है, शैतान !

ख़त्म करो, यह सती-प्रथा,

जागो मिट्टी की मुहूर्त या

जगा दो! उस भारत की फिर एक वीर कथा,

आज भी तन का एक-एक लहू का कतरा,

कहता! रहना तैयार सदा तुम नारी,

न सहना खतरा,

सारा जन, तुम्हे करते है, आज नमन !

इस धरती की दामन थामकर सो गए मोहन,

यूँही लेते रहना, सदा तुम जनम,

करता हूँ, मैं पुनः कोटि-कोटि नमन |

-ऋषि के.सी.

फरियाद-ऋषि के.सी.

चम चमाती चांदनी रात,

चारों ओर से आयी है,

खिल-खिलाकार हंसी तुम्हारी,

ना जाने किससे बनकर आयी है।
थककर सायं सो जाता है,

कौन उसके हृदय की व्यथा को जानता है,

स्वार्थी हृदय में एहसास जागृत हो ही गया,

याद आओगे हरपल तुम,

चाहें हमदर्द बेगाना होकर रह गया।
अनजानी- सी-तास्वीर लिए फिरता हूँ,

देखा नहीं उसको ,फिर भी याद किया करता हूँ,

सभी परिवार को खुश रखना,

बनाना अपना सबको,

यथा ना जिंदगी ना दोबारा मिलती है,

और ना ही दोबारा मिलाती हैं,

इसी हर्ष में, जो है तुझमे,

जरा खुलकर हँस ले दोस्त इसमें,

सदा खुदा से मैं तेरी,

यही फरियाद किया कारता हूँ।

अलविदा-ऋषि के.सी

अधूरा हूँ मैं,अधूरी है जवानी,

जिन्दा हूँ मैं,कम है जिंदगानी

अभी क़त्ल हुआ,बनी एक नई कहानी
सुबह की किरण,रातों का तारा, 

नयन में आंसू लिए मुस्कुरा रहा है दोस्त हमारा

भुला पायें नही उन्हें,जिन्हें दिल तोडने का शौक हैं

गम पिया जाये नही,जिस दिल में तुम्हारी प्यारी यादें है
मैं विद्यालय से निकला तब,जब अकेला था

दोस्त का कब साथ,अपना गुजारने का वक़्त था
हो गया दुखी ह्रदय अनोखा,

न जाने अनोखा-सा क्यों हुआ धोका
सपना टूटा आइने के लाख कण से,

बस यूँ साथ छुटा इस जाहा के डर से
मत निकल आंसू इस नयनो से,

तूने क्या गुन्हा किया है,

अलविदा मेरे हमसफ़र,एक दिन यही कहना पड़ता है

या कहो तुम,यही दोस्ती का अंतिम शब्द(पल) होता हैं |

-ऋषि के.सी.
“कभी अलविदा ना कहना”

यादों की मुलाक़ात

गुन-गुना रहा हूँ,तेरे लिए,

जाने खुदा!कहो तुम!

दिल भी कितना रोता है,क्यों ?

अब तेरी बेखुदी जो यूँ,
तनया जियेंगे मरना है जो,

किस्मत में कहा मिली है तू,

किससे पूछा करेंगे ख़ुशी अपनी,

तेरी यादें आयेंगी यूँ,
दोस्ती भी तेरे नाम की,

जाम भी तेरे काम की,

जिन्दगी में क्यों आई,साज़ लेकर,

जाना था जिंदगी में काटों को सहज़ बनाकर,

अधूरे रह जायेंगे,तुम्हारे बिना,

अगर दिल तोडा,यूँ हंसाकार,

फिर आऊंगा अगली बार,तुम्हारा मैं बनकर,

कभी भूल थी, क्या सनम,

कभी तुम थी या वर्षों का गम,

सदा तेरी सजदा करेंगे,न तो वरना गुजर जायेंगे हम|

-ऋषि के.सी.

एहसाास वर्षा का

पेड़ -पौधें लहराते

हवाओं में,

बिजली चमकती

बादालो में,

मैं भी घिर गया

तूफ़ानो मे,

कट रहे थे पल

मुश्किलों में।

कोई पूछे हाल हमारा

यही आश लगा

हम बैठे थे ,

याद आ रही अपनो की

बस रब को याद किये

जा रहे थे ,

गरजते -गरजते बादल

पानी का पेगा़म

बता रहे थे ,

छुआ हृदय तो

खुशी का जाम

पिला रहें थे।